द र अ स ल
Friday, January 1, 2016
2015 की पंद्रह किताबें
›
जैसे सब वर्ष अंतत: गुजर जाते हैं वैसे ही वर्ष 2015 भी गुजर गया। संसार में गुजर जाना एक शाश्वत क्रिया है, लेकिन इस गुजर जाने को ए...
Friday, August 21, 2015
युवा कविता : एक अपील
›
इतिहासबोध के लिए एक क्रमभंग अच्युतानंद मिश्र * मित्रो, ...गए दिनों हिंदी में युवा कविता को लेकर एक बहस की स्थिति ब...
8 comments:
Saturday, June 20, 2015
‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर पंकज चतुर्वेदी की एक कविता
›
आइए समलैंगिकता एक प्यार है इंसान का इंसान से ज़रूरी नहीं लैंगिकता का ख़याल रखकर किया जाए एक समाचार चैनल पर समलैंगिकत...
Sunday, June 7, 2015
कि जैसे मुझे इसका भी पता था
›
इस मंच पर विराजमान ये सभी लोग खोए हुए लोग हैं इनके नाम के बातस्वीर इश्तिहार भी शायद निकले हुए हों जो मनुष्य अभ...
4 comments:
Saturday, December 27, 2014
2014 की चौदह किताबें
›
‘तद्भव’ के 30वें अंक में वरिष्ठ कवि अरुण कमल अपने आत्मकथात्मक-वृत्तांत में कहते हैं, ‘‘बहुत से लोग आते हैं, कोई विज्ञप्ति चाहता है, क...
7 comments:
‹
›
Home
View web version