द र अ स ल
Saturday, June 20, 2015
‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर पंकज चतुर्वेदी की एक कविता
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आइए समलैंगिकता एक प्यार है इंसान का इंसान से ज़रूरी नहीं लैंगिकता का ख़याल रखकर किया जाए एक समाचार चैनल पर समलैंगिकत...
Sunday, June 7, 2015
कि जैसे मुझे इसका भी पता था
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इस मंच पर विराजमान ये सभी लोग खोए हुए लोग हैं इनके नाम के बातस्वीर इश्तिहार भी शायद निकले हुए हों जो मनुष्य अभ...
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Saturday, December 27, 2014
2014 की चौदह किताबें
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‘तद्भव’ के 30वें अंक में वरिष्ठ कवि अरुण कमल अपने आत्मकथात्मक-वृत्तांत में कहते हैं, ‘‘बहुत से लोग आते हैं, कोई विज्ञप्ति चाहता है, क...
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Thursday, September 4, 2014
कहां नहीं है ‘बखेड़ापुर’
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वर्तमान की चापलूसी में तुम कभी भी अपने अतीत को व्यर्थ नहीं समझोगे सारी दुर्घटनाएं सींचेगी हरे-हरे पात लाएंगी आने वाली पीढ़ि...
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Monday, August 4, 2014
पैंतीस वर्ष कम नहीं होते बेवकूफियों के लिए
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‘‘सूक्ष्म अंतर्दृष्टि। संयत कला। अनुशासन और आत्मीयता।’’ यह अशोक वाजपेयी का निर्णायक मत है। यह उन्होंने आज से करीब पैंतीस वर्ष पहले अर...
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